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सच के पीछे का सच

पुनर्विचार याचिका और राजनीतिक शोर

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दी हिन्दू अखबार ने फरवरी में राफेल सौदे के एक दस्तावेज का कुछ हिस्सा छापा था अखबार की उसी खबर को सरकार के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत बताते हुए प्रशांत भूषण, अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा आदि सुप्रीमकोर्ट गये थे। इस इन्होंने उसी खबर के आधार पर राफेल मामले की फिर से सुनवाई की पुनर्विचार याचिका दायर की थी। केन्द्र सरकार ने उस दस्तावेज़ को चोरीे किया गया अवैध दस्तावेज बताकर उसके आधार पर की जा रही पुनर्विचार याचिका की मांग को खारिज करने की मांग की थी।
सुप्रीमकोर्ट का निर्णय है कि इस आधार पर किसी दस्तावेज़ को खारिज़ नहीं किया जा सकता कि वो कैसे प्राप्त किया गया है। अतः भूषण, शौरी, सिन्हा की पुनर्विचार यााचिका पर इसी आधार पर सुप्रीमकोर्ट सुनवाई करेगा। उसकी सुनवाई के बाद यह तय होगा कि जिस छापी गयी खबर को भूषण शौरी सिन्हा आदि बहुत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक बता रहे है वह वास्तव कितनी प्रासंगिक है ।
ज्ञात रहे कि इससे पहले भी जस्टिस लोया की मौत से सम्बन्धित सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रशांत भूषण ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जो स्वीकार भी ली गयी थी। लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी याचिका की धज्जियां उड़ गई थी और 31 जुलाई 2018 को सुप्रीमकोर्ट ने उस याचिका को खारिज़ कर दिया था।
आज भी पुनर्विचार याचिका की मांग स्वीकार की गई है। 99% मामलों में पुनर्विचार याचिका स्वीकार की जाती है। कोर्ट का फैसला इन दस्तावेजों संबंधित सुनवाई पर है, राफेल पर पूर्व में दिए गए फैसले को यह प्रभावित नहीं करता है
अतः आज भी इसका स्वीकारा जाना कोई विशेष नहीं है। आज के फैसले से राफेल डील का भी कोई लेनादेना नहीं है। अब पुनर्विचार याचिका पर दोनों पक्षों के तथ्य और तर्क सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह फैसला करेगा कि राफेल डील पर दोबारा सुनवाई की जाए कि नहीं की जाए।
आज के फैसले से न्यूज चैनल जिस तरह अचानक बुरी तरह भ्रमित हुए और विपक्षी दल जिस तरह अचानक बुरी तरह बौराए हुए नज़र आने लगे हैं, विपक्षी दल इस फैसले को घुमा फिराकर चुनाव में अपने मन माफिक हथियार के रूप में देख रहे हैं राफेल डील पर CAG की बहुत विस्तृत रिपोर्ट आ चुकी है। जिसपर महीनों तक अपनी खोपड़ी खपाने-लड़ाने के बावजूद भूषण शौरी सिन्हा की तिकड़ी और विपक्षी दल फौज किसी प्रकार की कोई खामी नहीं ढूंढ पायी है। सुप्रीमकोर्ट द्वारा राफेल डील को दी गयी क्लीनचिट आज भी ज्यों की त्यों अस्तित्व में है। अपने उंस फैसले पर किसी प्रकार की कोई रोक सुप्रीमकोर्ट ने नहीं लगाई है।

आज भाजपा द्वारा राहुल गाँधी के सुप्रीम कोर्ट ने भी माना चौकीदार चोर है वाली याचिका पर सुनवाई करते है राहुल गाँधी को जबरदस्त फटकार लगाई और उन्हें ८ दिन में इसपर जबाब देने के लिए कहा है

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