हे भारत के वीर उठो, में तुम्हें उठाने आया हूँ,

हे भारत के वीर उठो, में तुम्हें उठाने आया हूँ,
गद्दारों की भाल कपाल पे, ध्वज लहराने आया हूँ।
साजिश का बारूद बिछा है, कश्मीर की सरहद पर,
मेरे साथ चलोगे क्या तुम, शीश चढ़ाने आया हूँ।

युद्ध हमारे द्वार खड़ा है, हमें दिखाई दे ना दे,
सीमा पर बूटों की आहट, हमे सुनाई दे ना दे,
लाल हो गई सारी झेलम, लाशें हर घर हर दर है,
स्वपन नही सच्चाई है, जी तुम्हें दिखाने आया हूँ।
हे भारत के वीर उठो, मैं तुम्हें उठाने आया हूँ।

जाग शिवा के वंशज जागो, राणा ले तलवार उठो,
रणचंडी का खप्पर भरना, करकर के हुंकार उठो,
घर घर हममे पृथ्वीराज है, हर योद्धा अभिनन्दन है,
हम में से हर कोई भगत है, यही बताने आया हूँ
हे भारत के वीर उठो, मैं तुम्हें उठाने आया हूँ।

कश्मीर ये सारा बैठा है, ज्वालामुखी के मुहाने पर,
नफ़रत घात लगाकर बैठी, शांति के ताने बाने पर,
सरहद पार के दुश्मन हमको, लाख दिखाई दें लेकिन,
सांप हमारी आस्तीन में, ये समझाने आया हूँ।
हे भारत के वीर उठो, मैं तुम्हें उठाने आया हूँ।

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