NGO महासचिव के भाई को जान से मारने की हुई नाकाम कोशिश।

क्या है पूरा मामला

21 अगस्त की रात्रि को 1नम्बर गली ब्रह्मपुरी धर्मशाला में एक जन्मदिन पार्टी थी, जिसमे DJ लगा हुआ था, धर्मशाला और दिल्ली पुलिस के नियम का पालन करते हुए DJ चलाने वाले लड़के अमित के द्वारा 10 बजते ही DJ बन्द कर दिया गया। इस पर वहाँ मौजूद राजवीर, सोनू, चन्दन, ब्रजपाल व धीरे ने अमित से DJ चलाने के लिए कहा मगर अमित ने DJ चलाने से मना कर दिया इस पर इन सभी लड़कों ने अमित को मारना शुरू कर दिया, इसी मारपीट के दौरान इनमे से ही किसी ने DJ की मिली पेमेंट 6000 रुपये को भी अमित की जेब से निकाल लिया गया।

इसके बाद अमित के पिता राजेश गुप्ता द्वारा 100 नम्बर पर कॉल की गई जिसमें पुलिस अमित को लेकर थाने आ गई।

पुलिस ने की लापरवाही

इस केस पर नियुक्त IO सहायक सब इंस्पेक्टर शिव मूर्ति यादव द्वारा लगभग 2 घण्टे तक भी अमित को मेडिकल सुविधा उपलब्ध नही कराई गई न ही अपराधियों को पकड़ने का कोई प्रयास किया गया। रात्रि 1बजे के लगभग जब पुलिस कुछ करती दिखाई नही दी तो राजेश गुप्ता ने अपने बड़े भाई राकेश गुप्ता को फोन करके घटना की जानकारी दी। राकेश गुप्ता जो कि दिल्ली में संघर्ष जन कल्याण समिति नाम से एक NGO पिछले 11 साल से चला रहे हैं उन्होंने तत्काल 100 नम्बर पर कॉल करके दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही लापरवाही की जानकारी दी मगर काफी देर तक पुलिस द्वारा कुछ ना किये जाने पर राकेश गुप्ता ने दिल्ली पुलिस कमांड रूम को सारी जानकारी दी, और खुद भी थाना न्यू उस्मानपुर चले गए, वहाँ जाने पर पता चला कि SHO न्यू उस्मानपुर ने शिव मूर्ति को तत्काल अमित का मेडिकल कराकर FIR दर्ज करने के आदेश दिए है।

क्या किया IO ASI शिव मूर्ति ने

शिव मूर्ति को जब राकेश गुप्ता द्वारा कहा गया कि आपने अमित के बयान ले लिए है अब उन लड़कों को भी थाने लेकर आइये, तब शिव मूर्ति ने कहा ठीक है आप थोड़ा रुक जाओ में अभी जिप्सी मंगा रहा हूँ फिर चलते हैं, इसके बाद स्वयं थाने से गायब होकर तीसरे पुस्ते जिप्सी लेने के लिए खुद चले गए जिस जिप्सी को मात्र फोन करके बुलाया जा सकता था, यहाँ गौरतलब बात ये है कि थाने और तीसरे पुस्ते के बीच मे ही अमित से मारपीट करने वाले सभी लोग रहते हैं। इसके बाद लगभग रात्रि 3 से सुबह 4 के बीच उन्हें पकड़ने के लिए कार्यवाही चलती रही मगर ना तो वे लोग पकड़े गए ना ही शिव मूर्ति ने FIR दर्ज की।

इसके बाद का घटनाक्रम

उन लड़कों पर कोई FIR रात को दर्ज हुई नही और नही ही पुलिस की ओर से अपराधियों को पकड़ने के लिए कोई कारगर कदम ही उठाया गया, इससे अपराधियों के हौंसले बुलंद थे उन्होंने दुबारा राकेश गुप्ता के छोटे भाई पूरन गुप्ता पर तकरीबन 10 बजे के लगभग 10 से 15 बदमाशों ने हमला कर दिया और उसको बेदर्दी से मारा ही नही बल्कि जान से मारने की नीयत से उसको नाले में फेकने लगे, इसी समय राकेश गुप्ता वहाँ पहुंचे और जैसे तैसे पूरन गुप्ता को नाले में फेंकने से बचाया गया, इसी दौरान मोहल्ले के कुछ लोग इकट्ठे हो गए और बदमाशों को भागना पड़े मगर उन बदमाशों में से एक राजवीर को राकेश गुप्ता ने पब्लिक की मदद से पकड़ लिया, इस दौरान 100 नम्बर पर कॉल भी हुई और थाने को भी सूचित किया गया और पहली बार ये देखने को मिला कि PCR से पहले लोकल पुलिस मौके पर पहुंची।

SHO न्यू उस्मानपुर की भूमिका

मामले की गम्भीरता को देखते हुए SHO उस्मानपुर ने तत्काल ही FIR की और भागे हुए अपराधीयों को पकड़ने के लिए कुछ जगह दबिश भी दी, मगर बाकी नामजद सोनू और चन्दन सहित अन्य पुलिस के हाथ नही चढ़े।

आज 3 बजे के लगभग पुलिस ने राजवीर को कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया जहाँ राजवीर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इस मामले में पुलिस ने कुल 2 FIR दर्ज की हैं और मात्र एक गिरफ्तारी हुई है, अन्य की गिरफ्तारी के बारे में बात करने पर IO नोशाद का कहना है कि पुलिस को अपना काम करने दें, ज्यादा दखलंदाजी ना करें। SHO न्यू उस्मानपुर से बाद में इस पूरे प्रकरण में बात नही हो पाई है।

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