एक गांव ऐसा जहां महिलाएं नहीं डालती हैं वोट

  1. उत्तर प्रदेश की धौरहरा लोकसभा क्षेत्र का गांव गनेशपुर जहां के किसी भी छोटे बड़े चुनाव में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है। इस बार प्रशासन 70 सालों से चली आ रही इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

धौरहरा लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के ईसानगर ब्लॉक में गनेशपुर गांव है। जहां करीब करीब 4500 की जनसंख्या पर करीब 3400 मतदाता हैं। इनमें महिलाओं की संख्या आधी है। चुनाव चाहे पंचायत का हो फिर लोकसभा या विधानसभा का। यहां मतदान पर पुरुष अपना इकलौता अधिकार जताते रहे। गांव में ब्याह कर आई महिला हो या यहीं जन्म लेने वाली महिला मतदाता। किसी को पोलिंग बूथ तक नहीं जाने दिया जाता है। अलबत्ता महिलाओं के वोट जरूर बनवाए जाएंगे। यहां की महिलाओं को हर तरह का सरकारी लाभ तो चाहिए। लेकिन इन्हेंकभी भी बूथ तक जाने की इजाजत नहीं दी गई।

लम्बी कोशिशें और नतीजा सिर्फ एक फीसदी पोलिंग
– पिछले चुनाव में प्रशासन ने पूरी ताकत लगा दी और मात्र इन 15 महिलाओं के वोट डलवा पाया, जो सरकारी सेवा में हैं।

प्रधान चुनी गई महिला ने भी नहीं डाला था अपना वोट

-साल 2000 में सम्पन्न हुए पंचायत चुनाव में गनेशपुर की प्रधानी की सीट महिला आरक्षित हो गई। इस बार आधी सदी पुरानी परम्परा टूटने की आस बंधी थी। पर चुनाव वाले दिन चुनाव लड़ रही सभी महिला प्रत्याशी बूथ के आसपास नहीं दिखीं। यहां तक कि ग्राम प्रधान चुनी गईं सुलोचना देवी खुद भी अपना वोट डालने नहीं आईं।

निश्चित रूप से यह परम्परा टूटनी चाहिए। महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रशासन प्रयासरत है। मैं व्यक्तिगत तौर पर भी महिलाओं को बूथ तक लाने की कोशिश करूंगा। अमरनाथ वर्मा, प्रधान गनेशपुर

वजहों और परंपराओं में न उलझकर इस बार महिलाओं की 100 फीसदी पोलिंग का लक्ष्य है, जिसको पाने के लिए जागरूकता अभियान गनेशपुर में चलाया गया। अभी कई और योजनाएं हैं जिनपर काम करके गनेशपुर की महिलाओं के वोट डलवाए जाएंगे। -आशीष कुमार मिश्रा, एसडीएम धौरहरा

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