एक नजर इधर भी

सियासत में नजर आती जूतम पैजार जारी है
ये कैसी बदगुमानी है, कैसी ये बीमारी है।
जो कुत्तों की तरह लड़ते रहे, थे एक ही घर से,
कैसी राजनीती ये जो इंसानियत पे भारी है.
#UPMEJOOTAMPAIZAR

समझ सब आ गया हमको, क्यों तूने जी लगाया है,
साथ दुश्मन का देने का, वादा तूने निभाया है।
मिटे गर देश मिट जाए, तुझे क्या फर्क पड़ना है,
यूँ वोट उनके पाने का, कुविचार मन में आया है।
#राहुलगाँधीअजहरजी

Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

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