तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है

हमारी फ़ौज के दम से, मेरा अभिमान बाकी है,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, अभी अरमान बाकी है।
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हमीद से वीर जिन्दा हैं, वतन पर जान देने को,
अभिनन्दन से सपूतों से , ये हिंदुस्तान बाकी है।
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वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जान देने का, अभी सम्मान बाकी है।
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हिमालय गर्व से उन्नत खड़ा है, तान कर सीना,
जगत सिरमौर होने का , अभी भी भान बाकी है।
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भगतसिंह, बोस,बिस्मिल के लहू से जो नहाई है,
महावीर ने दिया हमको, अभी जो ज्ञान बाकी है।
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की रिश्वत खोर बैठें हैं, जमीं से आसमानों तक,
तुम्हें देखूं तो लगता है, अभी ईमान बाकी है।
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दुनिया भर के शास्त्रों को, तूने पड़ लिया होगा,
कहो क्या गीता में लिखा, पड़ना कुरान बाकी है।
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हम बोते खून खेतों में, सदा ये भूल जाते हैं,
मेरी दिवाली बाकी है, तेरा रमज़ान बाकी है।
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वतन के द्रोही हैं, हैं पाक हमजोली कायर जो,
वही रणभूमि चिल्लाते, है शांति गान बाकी है।
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जाफर और जयचंदों, को मैने पाल रखा है,
उन्ही की चालों के चलते, ये पाकिस्तान बाकी है।
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Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

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