INNPI

सच के पीछे का सच

अभिनन्दन

1 min read

दुआओं से नही आना है, वापिस यार अभिनन्दन,
खल और दुष्ट के आगे, क्यों हो याचना वंदन,
उठो, दहाडो, दुश्मन की छाती चीर कर लाओ,
जाओ छीन अभिनन्दन को मेरे वीरवर लाओ।
**
ये कैसी कूटनीति थी, ये कैसी राजनीति है,
महज दो रोज के भीतर, हुए आज़ाद अभिनंदन।
रहा है शेर की मानिंद खड़ा, तू कैद ए दुश्मन में,
तेरा शत बार अभिनन्दन, मुबारक बाद अभिनन्दन।
**
वो राजी से नही सौपें है, अपना शेर अभिनन्दन,
वो भितरघाती, कुटील, पापी, करो ना पाक का वंदन।
जो शान्ति की है रखता चाह, पाकिस्तान पल भर भी,
हाफिज सौंपे भारत को, सौंपे दाऊद, अजहर भी।
**

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *