अभिनन्दन

दुआओं से नही आना है, वापिस यार अभिनन्दन,
खल और दुष्ट के आगे, क्यों हो याचना वंदन,
उठो, दहाडो, दुश्मन की छाती चीर कर लाओ,
जाओ छीन अभिनन्दन को मेरे वीरवर लाओ।
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ये कैसी कूटनीति थी, ये कैसी राजनीति है,
महज दो रोज के भीतर, हुए आज़ाद अभिनंदन।
रहा है शेर की मानिंद खड़ा, तू कैद ए दुश्मन में,
तेरा शत बार अभिनन्दन, मुबारक बाद अभिनन्दन।
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वो राजी से नही सौपें है, अपना शेर अभिनन्दन,
वो भितरघाती, कुटील, पापी, करो ना पाक का वंदन।
जो शान्ति की है रखता चाह, पाकिस्तान पल भर भी,
हाफिज सौंपे भारत को, सौंपे दाऊद, अजहर भी।
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Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

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