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सच के पीछे का सच

शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे

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तुझे मालूम भी कुछ है, तेरे जो बोल बिगड़े हैं,
शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे।
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वो दुश्मन को मिटाये, या लाशों की करें गिनती,
सियासी पिच पे कैसा, ये तेरा बबाल है प्यारे।
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पुलवामा भी तुझे क्योंकर, दुर्घटना नजर आई,
हाफिज साहिब लगता है, बड़ा कमाल है प्यारे।
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जंगल और पहाड़ों पर, किया बेकार ही हमला,
तेरी ये जान का सिद्धू, बहुत जंजाल है प्यारे।
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तुझे जय हिंद कहने में, क्यों परहेज होता है,
तेरी नीयत में आया क्यों, बराबर बाल है प्यारे।
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नमो तू देश का प्रमुख, फर्ज ये ही तो तेरा है,
किया जो फ़ौज को करना, यही हर हाल है प्यारे।
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तू इसको चुनावों में, भुनाना चाहता है क्यों,
नही इसमें तेरा कुछ भी, कोई कमाल है प्यारे।
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