शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे

तुझे मालूम भी कुछ है, तेरे जो बोल बिगड़े हैं,
शहीदों की शहादत पर, तेरा सवाल है प्यारे।
**
वो दुश्मन को मिटाये, या लाशों की करें गिनती,
सियासी पिच पे कैसा, ये तेरा बबाल है प्यारे।
**
पुलवामा भी तुझे क्योंकर, दुर्घटना नजर आई,
हाफिज साहिब लगता है, बड़ा कमाल है प्यारे।
**
जंगल और पहाड़ों पर, किया बेकार ही हमला,
तेरी ये जान का सिद्धू, बहुत जंजाल है प्यारे।
**
तुझे जय हिंद कहने में, क्यों परहेज होता है,
तेरी नीयत में आया क्यों, बराबर बाल है प्यारे।
**
नमो तू देश का प्रमुख, फर्ज ये ही तो तेरा है,
किया जो फ़ौज को करना, यही हर हाल है प्यारे।
*
तू इसको चुनावों में, भुनाना चाहता है क्यों,
नही इसमें तेरा कुछ भी, कोई कमाल है प्यारे।
**

Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *