शब्द गर ही ना रहे तो देश चुप हो जाएगा

शब्द है आज़ाद जब तक, देश की परवाज़ तब तक,
शब्द गर चुप हो गए तो, देश चुप हो जाएगा।
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शब्द हैं तो है भगतसिंह, शब्द ही से गांधी है,
शब्द ही गर ना रहे , आज़ाद भी खो जाएगा।
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होते गर ना शब्द फिर आज़ादी हम लाते कहाँ से,
लाला क्या फिर बोल पाते, लाठी खा रो जाएगा।
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शब्द ही के दम से भारत, विश्व मे दमदार है,
शब्द के दम से शांति, शब्द युद्ध भी बो जाएगा।
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शब्द ही जब ना रहेंगे, शब्द वीरों का क्या होगा,
शब्द के ही दम से जो जिंदा, उन लकीरों का क्या होगा।
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शब्द गर ख़ामोश होते, द्रोपदी ना चीर होता,
भीष्म और दुर्योधन, ना अभिमन्यु सा वीर होता।
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शब्द सीना ना चीरते, शब्द गर खो जाते जो,
शब्द अपनो को ना खोते, लव चुप ही रह जाते जो।
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शब्द की महिमा बखाने शब्द भेदी कौन है,
खुद में है तूफ़ां छुपाये, शब्द जब तक मौन है।
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शब्द है जब तक मैं हूँ, में हूँ जब तक नाद है,
शब्द से ही है बहारें, शब्द से चमन आबाद है

Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

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