है नमन उनको की जिनके दम से है दमदार भारत

है नमन उनको की जिनके, दम से है दमदार भारत,
है नमन उनको की जो, जीवित हिमालय हो गए है।
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है नमन उनको की जो, हँस कर जहर का है पान करते,
हिन्द की मिट्टी में कब, कैसे, कहाँ वो खो गए है।
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है नमन उनको की जो माता की गोदी छोड़ आये,
हिन्द की माटी को माँ कह, गोद माँ की सो गए है।
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है नमन उनको जो हँस कर, फाँसी के फंदे पे झूले,
लौट कर आये नही है, किस सफर को वो गए है।
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हैं नमन उनको की जो, सीमा पे दिन रात जगते,
छोड़ कर मधुमास अपना, मेरी खातिर जो गए है।
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है नमन उनको की जो, पुलवामा में मारे गए है,
घर के जयचंदों के चलते, जिनके परिजन रो रहे है।
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है नमन उनको की जो, बलिवेदी सत्ता की चढ़े है,
खुद के हाथों ही जो खुद की, लाश काँधे ढो रहे है।
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है नमन उनको की जिनके, दम से है आज़ाद भारत,
जलियांवाला की मिट्टी में, जज्ब कबके ही गए है।
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Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

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