गाल गर बजाने से बात अगर बन जाती


वन्दे मातरम दोस्तों,
गाल गर बजाने से, बात अगर बन जाती,
मेहनत कर दुनिया मैं, रोटी कमाता कौन,
बातों से खेतों मैं, फसल गर होती पैदा,
जेठ की दोपहरी मैं, हल फिर चलाता कौन,
बातें ही बनाने से, महल अगर बन जाते,
मिटटी मैं मिटटी हो, गारा बनाता कौन,
बातें ही बनाने से, बदन अगर ढक जाता,
कपड़ा बनाने को, चरखा चलाता कौन,
बातें ही बनाने से, नहरें अगर खुद जाती,
जलते रेगिस्तान मैं भी, हरियाली लाता कौन,
गाल ही बजाने से, युद्ध अगर जीते जाते,
सरहद पर जाकर के, लहू फिर बहाता कौन,
गाल ही बजाते रहते, गर हमारे अमर शहीद,
सोचो भारत माँ को, आजाद कराता कौन??

Rakesh gupta

लेखक कविताएं व ब्लॉग लिखता रहा है। संघर्ष NGO का फाउंडर महासचिव है, 30 साल से फ्रीलांसर पत्रकार है। है लेखक क्या चाहता है लेखक के शब्द मेरे देश मे भुखमरी, बेरोजगारी, असुरक्षा और भय का वातावरण खत्म होना चाहिए। भरष्टाचारियों और अपराधियों के लिए कठोर कानून होना चाहिये। सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए मगर पुलिस को कर्तव्य पालन में अधिक कठोरता दिखानी होगी।

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