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सच के पीछे का सच

धोनी बिना अधूरे कोहली:- नीली जर्सी में हिट IPL में फ्लॉप

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रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान के रूप में विराट कोहली का रिकॉर्ड इस सीजन के आईपीएल में लगातार बद से बदतर होता जा रहा है। इसका अंदाजा टीम की लगातार चौथी हार से भी लगाया जा सकता है जो उन्हे राजस्थान के खिलाफ मिली थी। यही नहीं कि आईपीएल के इसी संस्करण में उनकी टीम का यह हाल है, पिछले दो सीजन में तो उनकी हालत इससे भी बुरी थी 2017 में वो आठवें स्थान पर थे और 2018 में छठे पायदान पर।

जीत से ज्यादा मिली हार

30-वर्षीय कोहली को 2012 में आरसीबी की कप्तानी मिली थी। आरसीबी ने उनकी कप्तानी में अब तक 100 मैच खेलें हैं, जिनमें से 44 मैच जीते हैं तो वहीं 51 में टीम को हार का सामना करना पड़ा है। इनमें दो मैचों टाई रहे हैं और तीन में कोई परिणाम नहीं आया है। राजस्थान के खिलाफ विराट आरसीबी के लिए 100वें मैच में कप्तानी करने के लिए उतरे थे और उसमें भी उन्हे हार का सामना करना पड़ा। विराट की कप्तानी में आरसीबी की यह 51वीं हार थी।

यहां खलती है धोनी की कमी

नीली जर्सी में हमेशा अपने साथी खिलाडि़यों को जोश से भरने वाले कोहली आरसीबी की लाल जर्सी में ऐसा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि भारतीय टीम में उनके पास एक अच्छी टीम और महेंद्र सिंह धोनी जैसे अनुभवी पूर्व कप्तान हैं, जो कठिन परिस्थितियों में उनका मार्गदर्शन करते हैं। लेकिन जब बात आरसीबी में उनकी कप्तानी की होती है, तो कोई भी उनके रास्ते में खड़ा नहीं होता है और न ही कोई उनके किसी फैसले पर सवाल उठा सकता है। उनका कद किसी और खिलाड़ी की तुलना में बड़ा होता है। लेकिन मैच जीतने के लिए आपको एक ऐसे कप्तान की जरूरत होती है, जो मैदान पर खड़ा हो, विनम्र हो और अपनी गलतियों को स्वीकार कर भी सके।

केवल एक बार फाइनल में पहुंचे

आईपीएल के इतिहास में आरसीबी अब तक केवल तीन बार ही फाइनल में जगह बना पाई है, जिनमें कि ये साल शामिल हैं- 2009, 2011, 2016। इन तीनों में से केवल 2016 में ही कोहली कप्तान रहे। 2012 से कोहली की कप्तानी में यह है आरसीबी का रिकॉर्ड:

    साल         स्थान     जीत प्रतिशत
    2012           5        50%
    2013           5        56%
    2014           7        35%
    2015           3(प्लेऑफ)        50%
    2016           2(रनर्स-अप)        57%
    2017           8        21%
    2018           6        42%

हालांकि विराट कोहली की बल्लेबाजी पर कोई सवाल नहीं है। वे सुरेश रैना के साथ इंडियन प्रीमियर लीग में सर्वकालिक प्रमुख रन-स्कोरर भी हैं। 130 से अधिक की स्ट्राइक रेट से उन्होंने 4,735 रन बनाए हैं, जिसमें 33 अर्द्धशतक और चार शतक शामिल हैं। इनमें से लगभग 3,000 रन उन्होने कप्तान के तौर पर बनाए हैं। लेकिन इस आईपीएल में अब तक उनका बल्ला भी शांत रहा है उन्होने 4 मैचो में महज 78 रन ही बनाए हैं।

भारतीय कप्तान के रूप में शानदार है रिकॉर्ड

आईपीएल में भले ही उनकी कप्तानी पर सवाल उठ रहे हों लेकिन, वहीं अगर बात करें कोहली के बतौर भारतीय कप्तान की तो उनका जीत प्रतिशत किसी भी कप्तान, जिसने किसी राष्ट्रीए टीम का 60 या उससे अधीक मैचो में नेतृत्व किया हो, में सबसे शानदार है। सभी प्रारूपों में उन्होने अब तक 72 मैचो में कप्तानी की है, जिनमें से 52 मैचो में जीत हासिल कर उनका जीत प्रतिशत 71.14 है। कोहली ने 29 टेस्ट में से 19 जीते हैं, 41 वनडे में से 32 और 7 टी-20 में से 4 में जीत हासिल की है। कोई भी कप्तान इस रिकोर्ड के करीब तक नही है, न ही स्टीव वॉ, रिक्की पॉटिंग, क्लीव ल्योड और न ही विव रिचर्डस भी इसके करीब हैं।

गंभीर ने की थी उनकी कप्तानी की आलोचना

इन सब के बीच अब कोहली को कप्तानी से हटाने की बात ने भी तूल पकड़ लिया है। हालांकि पहले भी आरसीबी के कप्तान के रूप में कोहली की क्षमता पर कई बार सवाल उठते रहें हैं। लेकिन इस सीज़न की शुरुआत से ही उनकी कप्तानी सवालों के घेरो में रही। कई लोगो ने उनकी आलोचना भी की, जिसमें सबसे बड़ा नाम गंभीर का है। उन्होने कहा कि पूर्णकालिक कप्तानी संभालने के सात साल बाद से वह खिताब न जीतने के बावजूद बैंगलुरु की फ्रेंचाइजी के कप्तान बने रहने के लिए काफी “भाग्यशाली” हैं।

तो क्या इन सब सवालो के बीच कोहली को कप्तानी छोड़नी चाहिए और स्वतंत्र रूप से केवल अपनी बल्लेबाजी पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वह टीम को जीत दिला सकें। शायद वह दोनो काम एक साथ नही कर पा रहे हैं और इसी वजह से उनकी बल्लेबाजी भी प्रभावित हो रही है। वे निसंदेह एक अच्छे बल्लेबाज, भारत के लिए अच्छे कप्तान भी हैं लेकिन आरसीबी के लिए नहीं।

क्या है एक्सपर्ट की राय

क्रिकेट एक्सपर्ट सुशील दोषी ने इस बारे में आउटलूक को बताया कि जब विराट कोहली भारतीय टीम के कप्तान होते हैं तो उनके पास एक अच्छी और संतुलित टीम होती है। साथ ही उन्होने कहा कि फिलहाल की भारतीय टीम काफी मजबूत है और उसकी मजबूती का मुख्य कारण उसके गेंदबाजो का सही संतुलन है। किसी भी टीम की जीत में उनके गेंदबाजो का बड़ा योगदान होता है और इस समय भारतीय गेंदबाज चाहे वो स्पिनर हो या पेसर, दोनो ही विकेट लेने वाले हैं।

वहीं आईपीएल में उनकी कप्तानी के विफल होने का कारण एक तो उनकी टीम में अनुभव की कमी होना और साथ ही उनके पास धोनी जैसे सीनियर खिलाड़ी का न होना है। जैसे भारतीय टीम में धोनी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएल के बाद विश्व कप भी करीब है जिसके मद्देनजर खिलाड़ी अपनी सीमाओं में रहकर खेल रहे हें और उस बड़े टूर्नामेंट से पहले चोटिल नही होना चाहते हैं। दोषी ने बताया कि एक अच्छी टीम के साथ साधारण कप्तान भी मैच जीतकर महान बन जाता है। लेकिन हकीकत में महान वह होता है जो एक साधारण टीम के साथ भी अपनी सूझ-बूझ से मैच जिता सके। ऐसा में कोहली को महान कप्तान कहना जल्दबाजी होगी अभी भी उन्हे कप्तानी में अपना लोहा मनवाना बाकी है।

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