आप 2013 और 2019 क्या खोया क्या पाया

आम आदमी पार्टी ने 2013 का चुनाव कांग्रेस विरोध को लेकर लड़ा था, कहना नही होगा की 2013 का वो दौर आप के उदय और कोंग्रेस के पतन का दौर था, भारतीय युवा बहुत मजबूती केे साथ अन्ना हजारे के आंदोलन के साथ जुड़ा हुआ था।

अरविंद केजरीवाल, योगेंद्र यादव, कुमार विस्वास, मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण कुछ ऐसे चेहरे थे जो सही मायनों में अन्ना आंदोलन की उपज थे, अन्ना हजारे के अलावा इस आंदोलन से जुड़ी किरण बेदी और बाबा रामदेव इस आंदोलन के प्रसिद्ध चेहरे थे।

कांग्रेस के 15 साल का शासन अपने आप मे जनता के असन्तोष को हवा दे रहा था और अन्ना आंदोलन को परवान चढ़ा रहा था।

अन्ना हजारे को छोड़कर लगभग बाकी सभी की राजनीति महत्वाकांक्षा थी, जिसने आंदोलन समाप्त होने के बाद राजनीतिक रंग लेना शुरु कर दिया और दिल्ली की जनता के बीच मे आप का उदय हुआ।

नोट:- हम किसी पार्टी की विचारधारा का समर्थन या विरोध नही करते हैं। आप सभी वोट अवश्य दें, किसको दें इससे हमें कोई वास्ता नही है

आज हम 2013 की आप को तलाश रहे थे तो कुछ तसवीरें हमारे हाथ लगी

 

 

हमने सोचा कि आपको दिखाया जाए कि किस तरह अरविंद केजरीवाल ने सत्ता सुख के लिए 2013 में कांग्रेसः के विरोध में चुनाव लड़ने के बाद उसी कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई और 6 माह के अंतराल में दिल्ली को चुनाव में धकेल दिया।

अब फिर आप और कांग्रेस में गठबंधन हुआ है। अरविंद केजरीवाल से जनता के कुछ चुभते हुए सवाल हैं

  1. जब आप एक बार चुनाव बाद गठबंधन करके देख चुके हैं, तो फिर अब क्यों।
  2. कांग्रेस विरोध में आप के जो चुनावी मुद्दे/वादे थे उनका क्या।
  3. क्या आप ने दिल्ली के लोगों के लिए ऐसा कुछ नही किया कि आपको चुनाव में जीत मिल सके।
  4. क्या दिल्ली की जनता ने आप को नकार दिया है।
  5. क्या सत्ता सुख के लिए मूल्यों का गला घोंटकर आप किसी भी हद तक जाएंगे।
  6. सवाल ये है कि अब कोंग्रेस के भर्ष्टाचार से लड़ने की जगह आप उन के हमकदम क्यों हो गई है।

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