दिल्ली:- अवैध सम्बन्धों में हुई हत्या की सुलझी गुत्थी

अनीता का चंचल और भटकता हुआ मन कभी एक पुरूष के प्‍यार से संतुष्‍ट नहीं हुआ, उसकी जिंदगी पति के अलावा भी दो आशिक थे जिनकों उसने अपना तन-मन सबकुछ सौंप दिया था। लेकिन बाद में पहला आशिक उसे अपनी राह का कांटा बनता दिखा तो उसने एक खौफनाक साजिश रच डाली और रास्‍ते के इस दूसरे कांटे को निकाल फेंका।  

सुनील वर्मा

सुबह के करीब छह बजे का वक्त था। सीताराम रोज की तरह द्वारका के सेक्‍टर 12 में बनी मार्केट में  बाइक पर अखबारों का बंडल अपनी बाइक पर रखकर उन्‍हें बांटने के लिए तेजी से एनएलयू कोलानी की तरफ जा रहा था। अचानक सेक्‍टर 13 में स्थित रेडीसन ब्‍लू होटल के सामने सड़क पर लोगों की भीड़ और गाजियों के कारण रास्‍ता बंद होंने के कारण सीताराम को बाइक रोकनी पड़़ी।

‘यार ये सुब‍ह ही सुबह कौन सी आफत आ पड़ी कि सड़क पर गाडियों को इतना रेला आ गया।’ 

बड़बडाते हुए बाइक रोककर सडक किनारे एक तरफ खड़ा करते हुए सीताराम ने देखा कि वहां खड़ी गाडियों में ज्‍यादातर गाडियां दिल्‍ली पुलिस की थी।

‘क्‍यों भाई…इतनी भीड क्‍यों है? कुछ हो गया क्‍या?’ सीताराम ने पहले से खड़े एक व्‍यक्ति को टोकते हुए सवाल किया। 

‘अंदर एक पार्क में किसी आदमी की लाश मिली है शायद किसी ने मर्डर कर दिया है।’

उस व्‍यक्ति ने सीताराम की जिज्ञासा शांत करते हुए जवाब दिया और आगे बढ़ गया। सूचना ऐसी थी कि न जाने क्‍यूं सीताराम की पार्क के भीतर जाकर ये देखने की जिज्ञासा हुई कि मरने वाला आखिर कौन है?

यही सोचकर सीताराम पार्क के भीतर पहुंचे गया जहां पार्क के एक कोने में झाडियों के पास दर्जनों पुलिस वालों की भीड जमा थी।

धड़कते दिल से सीताराम वहां पहुंच गया जहां पुलिस की भीड थी और काफी लोग भी जमा थे। वहीं पर एक व्‍यक्ति शव भी पड़ा था। पुलिस लोगों को बुला-बुलाकर उस व्‍यक्ति का शव लोगों को दिखा रही थी जिसकी अभी तक पहचान नहीं हुई थी।

एक पुलिस वाले से इजाजत लेकर सीताराम भी उस स्‍थान तक पहुंच गया जहां एक युवक का खून से लथपथ शव पड़ा था।

‘भैय्या….अरे ये तो हमारे राजाराम भैय्या है।’

शव के उपर पहली नजर पड़ते ही सीताराम के मुंह से चीख निकल गई और वह कसिर पकडकर वहीं जमीन पर बैठ गया।

सीताराम के मुंह से ये शब्‍द निकलते ही वहां खड़े सभी पुलिस अधिकारियों का ध्‍यान अचानक सीता राम पर केन्द्रित हो गया।

‘क्‍या तुम इस आदमी को जानते हो।’ वहां खड़े द्वारका नार्थ थाने के एसएचओ संजय कुमार कुंडू ने ने सीताराम के समीप आते हुए कहा।

‘सर ये मेरे बड़े भाई है…रात भर गायब रहे थे और मैं इन्‍हें रात भर ढूंडता रहा हूं।’ इंसपेक्‍टर संजय कुमार के सामने खड़ा सीताराम अचानक भाई की लाश देखकर सुबक-सुबक कर रोने लगा।

एसएचओ संजय कुमार के चेहरे पर ये जानकर सकून के भाव उभर आए कि मरने वाले की पहचान तो हो गई है। उन्‍होंने सीताराम के कंधे पर सांत्‍वना भरा हाथ रखकर उसे चुप होंने के लिए कहा और इसके बाद उससे धीरे-धीरे सारी बात पूछने लगे।

अनीता अपने दूसरे प्रेमी करण के साथ

दरअसल, हुआ यूं था कि 28 सितंबर 2018 की सुबह के करीब साढे पांच बजे जब कुछ लोग द्वारका स्थित पांच सितारा होटल रेडीसन ब्‍लू से सटे पार्क सुबह कर सैर करने पहुंचे तो उन्‍होंने वहां झाडियों के बीच खून से लथपथ पड़ी एक युवक की लाश पड़ी थी। सैर करने वाले किसी व्‍यक्ति ने कंट्रोल रूम को फोन करके लाश पड़े होंने की इत्‍तला दे दी। अगले दस मिनट में पीसीआर की गाडी वहां पहुंच गई।

पीसीआर की गाडी ने शव मिलने की पुष्टि करते ही उस क्षेत्र के थाने द्वारका नार्थ थाने को फोन करके बताया कि रेडीसन ब्‍लू होटल से सटे पार्क में एक युवक की लाश पडी है। इस सूचना पर सबसे पहले ड्यूटी अफसर सब इंसपेक्‍टर सतीश यादव घटना स्‍थल पर पहुंचे इसके बाद एसएचओ संजय कुमार, एटीओ इंसपेक्‍टर निर्मला, तथा इन्‍वेस्‍टीगेशन इंसपेक्‍टर अरूण कुमार पाल घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मृतक के सिर पर किसी पत्थर नुमा चीज से वार किया गया था, और उसका गला किसी धारदार हथियार से काटा गया था। इसी कारण शायद उसकी मौत हुई थी। मृतक के कपड़े जिस तरह से फटे हुए थे और जमीन पर आसपास खींचातानी के निशान थे उसे देखकर साफ लग रहा था कि शायद मरने से पहले मृतक ने हत्यारों के साथ काफी संघर्ष किया था। तब तक लाश की सूचना पाकर द्वारका इलाके के एसीपी राजेन्‍द्र सिंह भी घटनास्‍थल पर पहुंच गए। घटनास्थल पर फर्श पर लगने वाले पत्थर के कुछ टुकड़े मिले एक टुकड़े पर खून के निशान भी लगे थे। शायद उसी से मृतक के सिर पर वार किया गया था जिससे उस पत्‍थर के टुकड़े हो गए थे। जब पुलिस टीम ने घटनास्‍थल की बारीकी से छानबीन की तो शव से कुछ ही दूरी पर खून से सना एक सेविंग ब्‍लेड भी मिला जिसे देखने से ही लग रहा था कि मृतक का गला उसे ब्‍लेड से रेता गया है। पुलिस ने पत्‍थर के टुकड़े व ब्‍लेड को अपने कब्‍जे में ले लिया। जमीन पर मृतक को घसीटे जाने के निशान भी थे, जिससे एसएचओ संजय कुमार ने अनुमान लगाया कि उसे शायद कुछ दूरी पर मारा गया था, लेकिन शव को ज्‍यादा समय तक लोगों की नजरों से बचाने के लिए उसे घसीटकर झाडियों के पास फेंका गया था। एक बात ये भी साफ हो रही थी कि वारदात को हुए कई घंटे बीत चुके थे क्‍योंकि मृतक के शरीर से बहता खून जमकर काला पड़ चुका था। इसका मतलब साफ था कि वारदात बीती रात या बीती शाम के किसी वक्‍त हुई होगी। मृतक की जेब की तलाशी में पुलिस को ढाई तीन सौ रूपए और एक मैट्रो कार्ड मिला था जिससे से तो साफ था कि उसकी हत्‍या लूटपाट के लिए नहीं की गई थी क्‍योंकि जेब के रूपयों के अलावा हाथ में कलाई घडी भी बंधी थी।

रेडीसन ब्‍लू से सटा पार्क जहा राजाराम की हत्या की थी

एसएचओ संजय कुमार के सामने सबसे पहली चुनौती ये थी कि मरने वाले की पहचान हो क्‍योंकि उसके जेब से या लाश के आसपास ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी जिससे उसकी वहचान हो सके। इसलिए एसएचओ संजय कुमार ने कुछ पुलिस वालों को पार्क के बाहर भेजकर आसपास रहने वालों तथा राहगीरों से पार्क में पड़े शव की बात बताकर उसकी पहचान करने के लिए बुलाया। ये संयोग ही थी कि सीताराम जो एनएलयू कालोनी में सुबह के वक्‍त अखबार बांटने का काम करता था वो रोज की तरह सेक्‍टर 12 मैट्रो स्‍टेशन के पास से अखबार को बंडल लेकर इसी रास्‍ते से गुजरता था। जब सीता राम ने भीड़ और रास्‍ता जाम देखकर जिज्ञासावश पार्क में पडी लाश को जाकर देखा तो ये देखकर चौंक पडा कि ये शव उसके बड़े भाई राजाराम (30) का है। एसीपी राजेन्‍द्र सिंह और एसएचओ संजय कुमार ने मृतक की पहचान होंने के बाद राहत की सांस ली। तब तक द्वारका जिले के डीसीपी एंटो अल्फांस भी फोरेसिंक टीम को लेकर घटनास्‍थल पर आ गए। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने घटनास्‍थल से कातिलों के निशान जुटाने से लेकर वहां एक एक चीज के नमूने लेने का काम शुरू कर दिया। फोटोग्राफर भी घटनास्‍थल के फोटो लेने में जुट गए।

तब तक उचाधिकारियों की उपस्थिति में एसएचओ संजय कुमार ने रोते बिलखते सीताराम को सांत्‍वना देकर चुप करा लिया था और उससे उसके भाई राजाराम के बारे मे पूछने लगे। जिसके बाद पता चला कि राजाराम शर्मा पुत्र लक्ष्‍मी शर्मा मूल रूप से यूपी के झांसी का रहने वाला है। लेकिन पिछले कई सालों से वह द्वारका की भरत विहार, जे जे कालोनी के ए-35 में नंबर प्‍लाट पर अपना मकान बनाकर रहता था। परिवार में उसकी पत्‍नी शुर्मिला देवी के अलावा छह साल एक बेटी व ढाई साल का एक बेटा है। इन दिनों राजाराम सीतापुरी में गारमेंट एक्सपोर्ट की शॉप पर काम किया करता था। राजाराम के साथ उसका छोटा भाई सीताराम भी उसी के साथ रहता था जो अभी अविवाहित है और सुबह के वक्‍त अखबार बांटने काम काम करता है। सुबह दस बजे से शाम सात बजे तक उत्‍तम नगर में एक बुक शॉप पर भी नौकरी करता था।

सीताराम ने बताया कि बीती रात यानि 27 सितंबर को जब वह करीब साढे आठ बजे घर पहुंचा तो उसकी भाभी ने रात नौ बजे बताया कि उसके भाई राजाराम अभी तक घर नहीं आया है जबकि वह सामान्‍यत: आठ बजे तक घर आ जाता था। लेकिन उस दिन जब वह साढे आठ तक भी घर नहीं पहुंचा तो शुर्मिला ने राजाराम के मोबाइल पर फोन किया लेकिन उसका मोबाइल नहीं मिल रहा था। ऐसा लगता था कि या तो वह स्विच ऑफ था रूा फिर नेटवर्क रेंज से बाहर था। कई बार ट्राई करने पर भी जब राजाराम का फोन नहीं लगा तो शुर्मिला ने अपने देवर सीताराम को ये बात बतायी। सीताराम ने भी अपने फोन से कई बार राजाराम को फोन लगाने की कोशिश की लेकिन उसका भी संपर्क नहीं हो पाया।

सीताराम ने उस गारमेंट फैक्‍ट्री के मालिक को फोन किया जहां राजाराम नौकरी करता था तो पता चला कि वह तो 27 सिंतबर की शाम को 5 बजे ही किसी जरूरी काम की वजह बताकर फैक्‍ट्री से चला गया था।

इसके बाद तो सीताराम व राजाराम की पत्‍नी की चिंता बढ गई। चूंकि राजाराम कभी कभार कुछ यार दोस्‍तों के साथ बैठकर शराब पी लिया करता था इसलिए सीताराम ने सोचा कि हो सकता है आज भी वह किन्‍हीं यार दोस्‍तो में बैंठ गया हो। सीताराम और शुर्मिला राजाराम के जिस-जिस दोस्‍त को जानते थे उन सभी से या तो फोन करके या फिर खुद जाकर उन्‍होंने देख लिया लेकिन राजाराम की कहीं भी खोज खबर नहीं मिली। इस कोशिश में रात के करीब 12 बजे गए थे। परेशान सीताराम ने सोच लिया कि अगर सुबह तक राजाराम घर नहीं लौटा तो सुबह अखबार बांटने का काम निबटते ही वह राजाराम के गायब होंने की रिपोर्ट थाने में लिखवा देगा। लेकिन अखबार बांटने के लिए जाते वक्‍त ही भाई की लाश मिल गई तो वह समझ गया कि बड़ा भाई अब कभी नहीं लौटेगा।

‘राजराम की किसी से कोई दुश्‍मनी थी या कोई ऐसा शख्‍स जिस पर तुम्‍हें शक हो कि वह उसकी हत्‍या कर सकता है।’ एसीपी राजेन्‍द्र सिंह ने सीताराम से पूछा।

‘नहीं सर मेरा भाई बहुत नेकदिल और सीधा सादा इंसान था कहीं लोग आपस में झगड भी रहे हो तो वह उस जगह से भी बचकर निकलता था…..स्‍वभाव का बेहद हंसमुख और शांत मिजाज इंसान था। इसलिए उसकी कभी ने तो किसी से दुश्‍मनी रही ने ही कोई लडाई झगडा हुआ।

द्वारका नार्थ थाने के एसएचओ संजय कुमार कुंडू

जब परिवार की तरफ से किसी पर राजाराम की हत्‍या का शक नहीं जताया गया तो एसएचओ ने संजय कुमार ने राजाराम के शव का पंचायत नामा भरकर उसे पोस्‍टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

द्वारका नार्थ थाने में उसी दिन अपराध संख्‍या 295/18 पर भादंस की धारा 302 व 201 में हत्‍या व सबूत मिटाने का मामला दर्ज कर लिया गया। जिसका जांच का काम एसएचओ संजय कुमार कुंडू के सुपुर्द कर दिया गया। डीसीपी एंटो एलफांस ने एसीपी राजेन्‍द्र सिंह की निगरानी में हत्‍याकांड की गुत्‍थी सुलाझाने के लिए विशेष टीम का गठन कर दिया। जिसमें सब इंस्पेक्टर सतीश यादव, सुनील कुमार, विकास यादव, हंसराज, बीरेंद्र, एएसआई वीरेंद्र, हेड कॉन्स्टेबल महावीर, जितेंद्र, कॉन्स्टेबल राजुराम व लेडी कॉन्स्टेबल संजू को शामिल किया गया। एसएचओ संजय कुमार ने पुलिस ने टीम को दो भागों में बांट दिया। एक टीम को राजाराम के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाकर उसके सहारे हत्‍याकांड की गुत्‍थी सुलझाने का काम सौंपा गया जबकि दूसरी टीम को आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखकर उस शाम पार्क में जाने वाले लोगों की जानकारी एकत्र करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई।

दोपहर बाद जब राजाराम के शव का पोस्‍टमार्टम हो गया तो पुलिस ने उसका शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने उसी शाम शव का अंतिम संस्‍कार कर दिया। इधर पुलिस टीम ने सबसे पहले जांच की कडी को आगे बढाते हुए सीताराम से राजाराम का मोबाइल नंबर लेकर उसकी कॉल डिटेल निकलवाई तो उसे देखने के बाद पता चला कि 27 सितंबर की रात करीब आठ बजे राजाराम को मोबाइल फोन बंद हो गया था। लेकिन उसके फोन पर जो कॉल थी वह भी करीब पॉने सात बजे की थी। कॉल डिटेल चेक करने से यह भी पता चला कि आखिरी काल से पहले उसी नंबर से कुछ घंटो के भीतर पांच बार राजाराम के फोन पर कॉल का आदान प्रदान हुआ था। जांच अधिकारी संजय कुमार को लगा कि हो न हो राजाराम के फोन पर आखिरी कॉल करने वाले से पता लगा सकता है कि राजाराम से आखिरी बार उसकी क्‍या बात हुई। पुलिस टीम ने उसी दिन उस नंबर की कॉल डिटेल व सीडीआर निकलवाई तो पता चला कि यह नंबर द्वारका की ही भरत विहार कालोनी के बी-122 में रहने वाले  वीरपाल सिंह के नाम पर पंजीकृत था। पुलिस ने जब इस मोबाइल की कॉल डिअेल चेक की तो इसमें एक नंबर ऐसा नंबर था जिससे वीरपाल के मोबाइल पर उस दिन लगातार बाते हुई थी। जब इस नए फोन नंबर के बारे में जानकारी हासिल की गई तो पता चला कि ये नंबर भी उसी पते पर पंजीकृत था लेकिन इसे खलक सिंह के नाम से पंजीकृत कराया गया था। एक ही पते पर रहने वाले दो लोग लेकिन जिनकी कडि़यां राजाराम की हत्‍या से जुड़ रही थी।

एसएचओ संजय कुमार ने उस पते पर फौरन पुलिस की एक टीम भेजी तो पता चला कि उस पते पर रहने वाले खलक सिंह और वीरपाल दो सगे भाई है। पुलिस दोनों को द्वारका नार्थ थाने ले आयी।

‘तुम लोगों ने राजाराम की हत्‍या क्‍यों की।’ जांच अधिकारी संजय कुमार ने दोनो भाईयों से सीधा सवाल किया।

‘राजाराम…कौन राजाराम सर….जब हम किसी राजाराम को जानते ही नहीं तो उसे मारेंगे किसलिए।’

खलक सिंह और वीरपाल ने चौंकते हुए कहा।

‘अगर तुम राजाराम नाम के किसी व्‍यक्ति को जानते ही नहीं तो उसके मोबाइल पर तुमने फोन क्‍यों किया वो भी एक बार नहीं कई बार तुम्‍हारी उसके नंबर पर बातचीत हुई।’ संजय कुमार ने सख्‍ती के साथ वीरपाल को डांटते हुए कहा तो वीरपाल एक बार फिर से चौंक गया।

‘कैसी बात कर रहे है आप सर न तो मैं किसी राजाराम को जानता हूं न ही मेरा पास उसका नंबर है।’

एसीपी राजेन्‍द्र सिंह

‘देखो वीरपाल झूठ बोलने से सच्‍चाई नहीं बदल जाएगी। हमने राजाराम, तुम्‍हारे और तुम्हारे भाई खलक तीनों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली ली है अगर यकीन नहीं है तो लो खुद देख लो।’ कहते हुए एसएचओ संजय कुमार ने तीनों मोबाइल की कॉल डिटेल वीरपाल की तरफ बढा दी। तीनों कॉल डिटेल को गौर से देखने के बाद वीरपाल कुछे देर शाम रहा और उसके बाद बोला ।

‘सर आपका कहना सही है कि मेरे फोन की डिटेल राजाराम तथा खलक भाई की डिटेल मेरे नंबर पर है लेकिन आपकों शायद ये नहीं पता कि ये दोनों नंबर हम दोनों भाईयों के नाम पर जरूर है लेकिन हम इन नंबरों का इस्‍तेमाल नहीं करते हमने तो ये दोनों नंबर अपने किराएदार करण के कहने पर उसे अपने नाम पर पंजीकृत करवाकर इस्‍तेमाल करने के लिए दे दिए थे।’

अब चौंकने की बारी इंसपेक्‍टर संजय कुमार की थी। ‘क्‍या कहा तुमने….तुम दोनों भाई इन नंबर को इस्‍तेमाल नहीं करते थे।’

‘नहीं सर आप यकीन मानिए इन दोनों नंबर का इस्‍तेमाल करण करता था हमने कभी नहीं किया।’

अभी तक इंसपेक्‍टर संजय कुमार समझ रहे थे कि वे हत्‍या की गुत्‍थी सुलझाने के करीब हैं। लेकिन ये जानकारी सामने आने के बाद अचानक मामले में एक नया  ट्विस्‍ट आ गया। लिहाजा उन्‍होंने वीरपाल तथा खलक सिंह से करण सिंह के बारे में सारी जानकारी देने के लिए कहा तो पता चला कि

करण सिंह(27) पुत्र संतराम मूल रूप से यूपी जालौन का रहना वाला है। करण सिंह खलक और वीरपाल के पिता खचेडा के गांव का ही रहने वाला है। एक साल वह नौकरी की तलाश में जब दिल्‍ली आया तो वीरपाल के पिता खचेडा ने उसे रहने के लिए अपने ही घर में एक कमरा किराए पर दे दिया। करण सिंह ने अपने हम उम्र खलक और वीरपाल से कहा कि उसके पास दिल्‍ली शहर का कोई आईडी प्रूफ नहीं है इसलिए दोनों में से कोई भाई अपनी आईडी से उसके लिए एक सिम कार्ड लेकर दे दें ताकि वह अपने फोन के लिए इनका इस्‍तेमाल कर सके। संयोग से दोनों ही भाई ने अपने नाम से एक–एक सिम ले लिया। इसलिए करण ने उनसे दोनों ही सिम ले लिए। उसका मोबाइल डयूल सिम वाला था इसलिए उसने दोनों ही सिम उसमें डाल लिए। लेकिन वह ज्‍यादा तर एक ही नंबर को इस्‍तेमाल करता था। कुछ दिन बाद ही करण की नौकरी सेक्‍टर 13 में फाइव स्‍टार होटल रेडीसन ब्‍लू के ग्रांउड फ्लोर पर बने फेब इंडिया शोरूम में लग गई और वह हाउसकीपिंग का काम करने लगा।

सारी बात जानने के बाद जांच अधिकारी संजय कुमार समझ गए कि जब तक करण से पूछताछ नहीं होगी तब तक राजाराम हत्‍याकांड की गुत्थी नहीं सुलझेगी।

रेडीसन ब्‍लू होटल

पुलिस की एक टीम तुरंत ही रेडीसन ब्‍लू होटल के फेब इंडिया शोरूम पहुंच गई। संयोग से करण शोरूम में ही मिल गया। पुलिस टीम उसे लेकर तुरंत थाने आ गई। इतना ही नहीं पुलिस टीम उसके ऑफिस से वह रिकार्ड भी ले आयी जिसमें करण ने अपना नाम पता और फोन नंबर दर्ज कराया था। संयोग से ये दोनों नंबर भी वही थे जो वीरपाल और खलक सिंह के नाम से पंजीकृत थे। पुलिस टीम ने थाने लाकर सख्‍ती के साथ पूछताछ की तो करण सिंह तोते की तरह बोलने लगा। उसने कबूल कर लिया कि उसने ही राजाराम की हत्‍या की थी। लेकिन राजाराम की हत्‍या उसने क्‍यों कि इस बात पर वह सिर्फ यहीं बता रहा था कि उसका रास्‍ते से गुतरते वक्‍त राजाराम से झगडा हो गया था इसलिए उसने उसकी पार्क में ले जाकर हत्‍या कर दी। एसीपी राजेन्‍द्र सिंह से लेकर एसएचओ संजय कुमार के गले से करण सिंह का न तो ये तर्क उतर रहा था कि रास्‍ते में हुए झगडे के कारण उसने राजाराम की हत्‍या की है क्‍योंकि अगर मनौवैज्ञानिक ढंग से सोचे तो सडक पर झगडा होंने पर इंसान उसी जगह अपने गुससे का इजहार करतो है जहां झगडा हुआ हो और वैसे भी राजाराम का इस इलाके में न तो कोई रूट था न ही वह अपनी मर्जी से आया था उसे वीरपाल के नाम से पंजीकृत मोबाइल से फोन करके बुलाया गया था। एक दूसरी बात ये भी थी कि करण सिंह और राजाराम की शारीरिक बनावट में भी जमीन आसमान का अंतर था। करण सिंह जहां दुबला पतला था वहीं राजाराम उसके कहीं ज्‍यादा बलिष्‍ठ व हष्‍ट पुष्‍ट था। करण सिंह जैसे दुबले पतले आदमी के काबू में राजाराम का आना ये सवाल खड़े कर रहा था कि हो न हो उसके साथ इस हत्‍याकांड में कोई और भी शामिल था।

पुलिस के अधिकारी करण सिंह से पूछताछ कर राजाराम की हत्‍या के कारणों को जानने के प्रयास में लगे ही थे कि इस दौरान गुतथी सुलझाने के लिए लगी पुलिस की दो टीमों ने अलग –अलग जानकारी देकर मामले में नया मोड़ ला दिया। दरअसल रेडीसन ब्‍लू होटल के सीसीटीवी कैमरे की छानबीन करने पर पता चला था कि घटना वाले दिन शाम को छह बजे करण से फेबइंडिया के ऑफिस यहीं पर काम करने वाली एक सिक्‍यूरिटी गार्ड अनीता के साथ बाहर निकला था। इतना ही नही पार्क के ठीक सामने एक दूसरी बिल्डिंग में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी करण अनिता नाम की उसी महिला के साथ पार्क में जाता दिखा था। रात करीब आठ बजे दोनों उसी पार्क से बाहर निकलते दिखे थे।  इसका मतलब साफ था कि करण के साथ उसका दूसरा सहयोगी कोई ओर नहीं बल्कि अनीता नाम की सिक्‍यूरिटी गार्ड थी। एक दूसरी जानकारी ये भी आयी कि वीरपाल के मोबाइल से एक अन्‍य फोन पर भी कॉल की गई थी। जब उस नंबर की छानबीन की गई तो पता चला कि ये नंबर उत्‍तम नगर में रहने वाले किसी राजेश कुमार के नाम से पंजीकृत है। पुलिस टीम को राजेश से फोन करने पर पूछताछ करने के बाद पता चला कि उसके पास 27 सितंबर की रात को इस नंबर से उसकी पत्‍नी अनीता ने फोन करके बताया था कि उसका एक्‍सीडेंट हो गया है और वह लाइफलाइन अस्‍पताल में है। इस सूचना पर वह अस्‍पताल पहुंचा था और अपनी पत्‍नी को वहां से डिस्‍चार्ज करवाकर बसई दारापुर स्थित सरकारी अस्‍पताल ले आया था।  

पुलिस को ये भी पता चला कि जिस रात राजाराम की हत्‍या हुई थी उसी रात करीब पौने नौ बजे पीसीआर को आयुष्‍मान अस्‍पताल से एक कॉल मिली थी कि एक महिला का एक्‍सीडेंट हो गया है ओर उसके सिर में चोट लगी है। लेकिन जब द्वारका नार्थ थाने की पुलिस वहां पहुंची तो पता चला कि वह महिला डाक्‍टरों को बिना बताए किसी दूसरे अस्‍पताल में जाने की बात कहकर वहां से चली गई थी। इसके बाद जब पुलिस उस घायल महिला को ढूंढते हुए लाइफ लाइन अस्‍पताल पहुंची थी तो वहां जानकारी मिली थी कि महिला का पति राजेश कुमार अस्‍पताल में प्राथमिक उपचार के बाद लिखित में लिखकर दे गया कि वह अपनी पत्‍नी को ले जाना चाहता है।

राजाराम

जब राजेश कुमार से बात की गई और उसने बताया कि उसकी पत्‍नी का द्वारका में एक्‍सीडेंट हो गया था ओर उसे उसकी पत्‍नी अनीता ने फोन करके अस्‍पताल बुलाया था तो संजय कुमार के सामने हत्‍याकांड की एक एक कडियां जुडने लगी। फैब इंडिया के शोरूम से अपने साथ काम करने वाली अनीता नाम की सिक्‍यूरिटी गार्ड के साथ एक साथ निकलना, सीटीटीवी फुटेज में दोनों का एक साथ उसी पार्क में एक साथ जाना जहां राजाराम की हत्‍या हुई ओर उसका शव बरामद हुआ था। इसके बाद वीरपाल के मोबाइल नंबर जो करण इस्‍तेमाल करता था उससे अनीता का अपने पति को फोन करना ये साबित करने के लिए प्रर्याप्‍त था कि हत्‍याकांड में अनीता और करण सिंह दोनों ही मिले हुए थे। लिहाजा अब सिर्फ ये जानना था कि राजाराम की हत्‍या कयों की गई और अनीता ने करण का साथ किसलिए दिया। पुलिस की एक टीम जब राजेश से फोन पर बात करके जब बसई दारापुर अस्‍तपाल पहुंची तो पता चला कि अनीता के सिर में काफी चोट थी । पुलिस ने जब डाक्‍टरों से बात की तो डाक्‍टरों ने उसे एक दिन और डाक्‍टरों की निकरानी में रखने का सुझाव दिया। लिहाजा अगले दिन यानि 1 अक्‍ब्‍ूबर को डाकटरों ने जैसे ही अनीता को डिस्‍चार्ज किया तो महिला पुलिसकर्मियों के सहयोग से उसे हिरासत में ले लिया। थाने लाकर जब करण सिंह व अनीता को आमने सामने बैठाकर दोनों से पूछताछ की गई तो वे दोनों बहुत देर तक पुलिस को बरगला नहीं सके। दोनों ने  कबूल कर लिया कि उन दोनों ने मिलकर ही राजाराम की हत्‍या की थी।

मूल रूप से पंजाब की रहने वाली अनीता (28) मूल रूप से पंजाब की रहने वाली है। शादी के बाद पांच साल पहले शादी के बाद ही अनीता अपने पति राजेश के साथ दिल्‍ली के उत्‍तम नगर के नन्‍हें पार्क में आकर रहने लगी थी। राजेश का अपना मकान था गुजर बसर के लिए वह उत्‍तम नगर की गारमेंट फैक्‍ट्री में एकाउटेंट व सुपरवाइजर की नौकरी करता था। दोनों का चार साल का एक बेटा है भी है।

राजेश जहां सीधा सादा इंसान था वहीं अनीता तेज तर्रार और मनचले स्‍वभाव की युवती थी। नए-नए फैशन करना, फिल्‍मे देखना और मौज मस्‍ती करना कुछ ऐसे शौक थे जिनके कारण राजेश और अनीता के बीच कभी तकरार हो जाती थी। दरअसल, राजेश की आमदनी के साधन सीमित थे। अनीता के अनाप शनाप खर्चो के कारण अक्‍सर राजेश को रूपए पैसे की तंगी का सामना करना पड़ जाता था। ऐसे में राजेश अनीता का खर्चो में किफायत बरतने की सलाह देता था।

जब अक्‍सर ऐसा होंने लगा तो अनीता ने अपने खर्च पूरा करने के लिए तथा घर में हाथ बंटाने के लिए नौकरी करने का फैंसला कर लिया। चूंकि अनीता पढी लिखी और व्‍यवहारिक थी इसलिए राजेश ने भी उसे नौकरी करने की इजाजत दे दी। तब तक अनीता एक बच्‍चे की मां बन चुकी थी और उसकी उम्र भी डेढ साल की हो चुकी थी। घर में उसे संभालने के लिए उसकी सांस थी लिहाजा करीब ढाई साल पहले अनीता ने उत्‍तम नगर के आदित्‍य ड्राईक्‍लीन स्‍टोर में नौकरी करने लगी। ये इस इलाके का बड़ा ड्राईक्‍लीनिंग शॉप है जहां और भी कई लोग काम करते थे। उन्‍हीं में था सबसे पुराना कर्मचारी राजाराम जो वहां करीब दस सालों से काम कर रहा था।

द्वारका नार्थ थाने के एसएचओ संजय कुमार कुंडू अपने स्टाफ के साथ

राजाराम उम्र में अनीता से तीन चार साल बड़ा था लेकिन अपने गौर वर्ण हष्‍टपुष्‍ट शरीर तथा खान पान के कारण एक दम युवा नजर आता था। चेहरे मोहरे से भी आकृषक था। स्‍वभाव से एकदम हसंमुख और हर समय हंसी ठिठोली करने वाला।  उसके इसी स्‍वभाव और व्‍यक्तित्‍व के कारण अनीता अनायास राजाराम की तरफ आकृषित हो गई। अनीता इस स्‍टोर में काम करने वाली इकलौती महिला था। और राजाराम शॉप मालिक का सबसे पुराना और भरोसेमंद नौकर था। इसलिए कभी कभार राजाराम अनीता को लेकर वक्‍त से पहले दुकान से उसे फिल्‍म दिखाने के लिए तो कभी बाहर खाना खिलाने ले जाता था। दो तीन महीने में ही दोनों के बीच ऐसी आत्‍मीयता हो गई कि अनीता उसके लिए खाना भी खुद ही बनाकर लाने लगी। ये आत्‍मीयता कब प्‍यार में बदल गई अनीता को पता ही नहीं चला। और इस प्‍यार के पागलपन में दोनों के बीच नाजायज रिश्‍ते भी बन गए। अनीता को एक बार राजाराम के रूप में पराए मर्द के शरीर की गंध सूंघने का क्‍या मिली कि अपना पति राजेश उसे फीका लगने लगा। राजाराम राजेश से कहीं ज्‍यादा ताकतवर था और बिस्‍तर पर उसे पति से ज्‍यादा प्‍यार राजाराम करता था। इसलिए वह राजाराम की पूरी तरह से दीवानी हो गई। इसके बाद तो दोनों के बीच अक्‍सर ही नाजायज संबधो की कहानी लिखी जाने लगी। राजाराम का परिवार बढा था लिहाजा उसके खर्चे भी ज्‍यादा थे इसलिए उसकी गुजर बुसर बेहद तंगी में होती थी। आमदनी सीमित थी इसलिए जब कभी उसे तंगी होती तो वह अनीता से हजार दो हजार रूपए उधार ले लेता।  अनीता तो चूंकि शौक के कारण नौकरी करती थी इसलिए वह भी बिना सोचे समझे उसे जब भी मांगता तो पैसे दे दिया गरती थी। इस तरह कई महीनों में राजाराम ने अनीता से 30 हजार स्‍पऐ से ज्‍यादा की रकम अनीता से उधार ले ली। वैसे भी दोनों अब तक दो जिस्‍म और एक जान बन चुके थे। अनीता राजाराम के प्‍यार में इस कदर दीवानी हो गई थी कि राजाराम दिन कहता तो वह भी दिन बोलती अगर वह रात बोलता तो अनीता भी रात कहती।

कब ढाई साल गुजर गया अनीता को पता ही नहीं चला। अचानक एक दिन आदित्‍य ड्राईक्‍लीन शॉप को उसके मालिक ने बेचने का फैंसला कर लिया और इसी कारण वहां काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी छोडनी पडी। नौकरी चली जाने के कारण अचानक राजाराम व अनीता का मिलना जुलना भी कम हो गया। अगर वे कहीं मिल भी लेते तो दोनों के मिलन की आस पूरी नहीं हो पाती थी। हांलाकि दो तीन महीने बाद राजाराम को तो उत्‍तम नगर की एक गारमेंट फैक्‍ट्री में नौकरी मिल गई लेकिन वह चाहकर भी अनीता को वहां नौकरी पर नहीं रखवा सका। इधर अनीता भी लंबे समय तक घर से बाहर नौकरी करने के कारण घर में कैद रहने की आदत से मुक्‍त हो चुकी थी इसलिए वह नई नौकरी ढूंढने लगी। आखिर एक साल अनीता को द्वारका के रेडीसन ब्‍लू होटल में बने फेब इंडिया शोरूम में सिक्‍यूरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई।

अनीता

यहां नौकरी शुरू करने के बाद बाद अनीता फिर से खुली हवा में सांस लेने लगी। यहा काम करते करते ही अनीता की दोस्‍त फेब इंडिया में हाउस कीपर की नौकरी करने वाले एक युवक करण सिंह से हो गई। करण राजाराम की तरह बलिष्‍ठ या आकृषक व्‍यक्तिव का स्‍वामी तो नहीं था लेकिन वह था बेहद हंसी मजाक करने वाला और हमेशा मस्‍त रहने वाला नौजवान। खासतौर से करण अनीता से हंसी ठिठौली कुछ ज्‍यादा ही करता था। अविवाहित होंने के कारण करण अनीता के गदराए हुए बदन और उसके जिस्‍म से निकलती मदहोश करने वाली मादक खूशबू को देखकर अक्‍सर मजाक मजाक में कह देता था कि उसके भाग्‍य में अनीता जैसी हसीन व खूबसूरत लडकी कब आएगी। वैसे ये बाते तो करण हसीं मजाक में करता था लेकिन अनीता ने उसकी आखों में अपने जिस्‍म को टटोलती उसकी आखों को अच्‍छी तरह से पढ लिया था। कुछ ही दिन में ऐसा हुआ कि अनीता राजाराम को भूलती गई और उसका आकृषण करण के प्रति बढता चला गया। अब तो अक्‍सर ऐसा होंने लगा कि राजाराम जब उसे मिलने के लिए बुलाता तो अनीता कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देती थी। इधर करण से बढ रही आत्‍मीयता जल्‍द ही दोनों के बीच जिस्‍मानी रिश्‍ते में बदल गई। करण शरीर से कमजोर व पतला दुबला जरूर था लेकिन प्‍यार करने के मामले में उसने बनीता के पति राजेश और राजाराम दोनों को पीछे छोड दिया। अक्‍सर दोनों के बीच कभी किसी पार्क में तो कभी कहीं सुनसान जगह पर शारीरिक रूप से एकाकार होंने का मौका मिल ही जाता था। लेकिन अनीता इन दिनों राजाराम से कुछ ज्‍यादा परेशान रहने लगी थी। राजाराम हर तीसरे चौथे दिन उसे फोन करके अपने पास कहीं मिलने के लिए बुलाता रहता था। वह अनीता पर पूरी तरह ऐसा अधिकार जमाता जैसे वह उसकी रखैल या नौकरानी हो। अगर अनीता ज्‍यादा बहाने बाजी करती तो वह उसे धमकी देने लगा था कि वह उसके पति को सारी बात बता देगा कि उसके बीच किस तरह के संबध रहे है। अनीता को अब राजाराम से न तो मिलना पंसद था न ही उससे संबध रखना। इसलिए वह कुछ परेशान रहने लगी। लिहाजा एक दिन करण ने उससे पूछ लिया कि वह किसलिए परेशान है लिहाजा अनीता ने करण को राजाराम से अपने संबधों की सारी बात बताकर थोडा झूठ भी बोल दिया कि राजाराम अब उसे ब्‍लैकमेल कर रहा है और जबरदस्‍ती अपने साथ संबध रखने के लिए मजबूर करता है। अनीता ने करण से पूछा कि क्‍या वह राजाराम से छुटकारा दिलाने में उसकी मदद कर सकता है तो प्‍यार की खातिर करण ने तुरंत हा कर दी। करण के हा करते ही अनीता के दिमाग में राजाराम की हत्‍या की साजिश कौंधने लगी। क्‍योंकि एक दिन राजाराम ने उससे कहा था कि अब तो इस जन्‍म में वह उसका पीछा तभी छोड सकता है जब वह मर जाएगा। अनीता ने सोचा कि क्‍यों ने राजाराम नाम के कांटे को अपनी जिंदगी के रास्‍ते से निकाल दिया जाए। इसलिए राजाराम की हत्‍या से कुछ दिन पहले अनीता ने अपने दिल की बात करण को बतायी। करण ने भी हामी भर दी। इसके लिए दोनों के बीच बातचीत होंने लगी कि किस तरह राजाराम की हत्‍या कर उसे रास्‍ते से हटाया जाए। आखिर कार योजना बन गई।

द्वारका डीसीपी एंटो एलफांस

पंद्रह दिन पहले करण ने वीरपाल के नाम वाला सिमकार्ड जिसे वह कभी यूज नही करता था वह अनीता को दे दिया और उससे कहा कि अब वह राजाराम को ये नंबर देकर कहे कि वह इसी पर बात किया करे। तो अनीता ने उस सिम को अपने डयूल सिम मोबाइल में डाल लिया। और राजाराम से उसी नंबर से अक्‍सर बात करने लगी। इसी नंबर से ही वह यदा कदा करण से भी बात करने लगी थी जो नंबर खलक सिंह के नाम से पंजीकृत था। इस दौरान अनीता राजाराम से अपने पैसे का तकादा भी करने लगी थी लेकिन पैसे की बात पर राजाराम अक्‍सर टाल्‍ मटोल कर बात को हंसी में उडा देता और कहता था कि तेरा और मेरा किसने बाटा है जानेमान जब मैं ही तुम्‍हारा हूं तो मेरी हर मेरी हर चीज भी तो तुम्‍हारी है।

अनीता से अक्‍सर रोज ही राजाराम की बात होती थी। 27 सितंबर को भी राजाराम ने सुबह जब अनीता को फोन किया और इधर उधर की बात करने के बाद पूछा कि बहुत दिन हो गए जानू कब मुलाकात हो रही है। तो अनीता ने सोची समझी योजना के मुताबिक उसे मिलने के लिए सेक्‍टर 13 में रेडीसन ब्‍लू होटल के समीप बने पार्क में मिलने के लिए बुलाया। दरअसल इस पार्क में शाम के वक्‍त ज्‍यादा भीड भाड नहीं रहती थी और झाडियों में कहीं भी प्रेमी जोडे आपस में इश्‍क फरमा सकते है। खुद अनीता व करण कई बार ने इसी पार्क में शाम के वक्‍त रंगरलिया मनायी थी। बस उस दिन अनीता से शाम सात बजे का वक्‍त मिलने के लिए तय होती ही राजाराम साढे पांच बजे ही अपनी फैक्‍ट्री से किसी जरूारी काम का बहाना करके निकल गया। और मैट्रो पकडकर सेक्‍टर 133 पहुंचा वहां से पैदल ही रेडीसन ब्‍लू होटल के पास वाले पार्क में पहुंच गया। उसके पास बस एक लैपटॉप वाला बैग था जिसमे उसका लंच बॉक्‍स था। लेकिन राजाराम के पार्क में पहुचने से पहले ही अनीता वा करण अपनी शॉप से बहाना बनाकर जल्‍दी निकल गए थे और एक साथ पार्क में पहुंच गए। वहां जाकर करीब सवा सात बजे अनीता ने जब राजाराम को फोन करके पूछा कि वह कहा है तो उसने बताया था कि वह पांच मिनट में पार्क में पहुंच जाएगा।  यही काल राजाराम के फोन पर आयी आखरी कॉल थी। इस बीच करण पार्क में एक जगह झाडियों के बीच छिप गया। वह अपने साथ संगमरमर के पत्‍थर की बडी सी पट्टी लाया था जो रेडीसन होटल  के बाहर लग रही पत्‍थर की टाइल्‍स का बचा हुआ टुकडा थी। अनीता राजाराम को पार्क के गेट पर ही मिल गई। राजाराम को साथ लेकर वह पार्क के भीतर चली गई और उस जगह झाडियों के करीब एक सुनसान जगह राजाराम के की गोद में सिर रखकर लेट गई जिस जगह का चुनाव अनीता ने करण के साथ पहले ही कर लिया था। कुछ देर तक राजाराम व अनीता के बीच इधर उधर की बातें होंने गली लेकिन थोडी देर में ही राजाराम पर अनीता के शरीर की मादक गंध का नशा छाने लगा। वह उस पर झुक गया और उसके होठ वर चेहरे को बेतहाशा चूमने लगा। इसी बीच चारो तरफ से बेखबर राजाराम पर झाडियों में छिपे खडे करण ने पीछे से आकर हाथ में पकड़े पतथर से उसके सिर पर जोर का प्रहार कर दिया। पत्‍थर लगने से राजाराम के सिर से खून तो बहने लगा लेकिन इससे उसे इतनी चोट नहीं पहुंची कि वह उसकी जान ले पाता। दूसरा वार करते ही वह करण के हाथ के पत्‍थर के कई टुकड़े होकर वहीं गिर पड़े। तब तक राजाराम भी संभल चुका था सरि से बहते खून की परवाह न करते हुए उसे करण को दबोच लिया। राजाराम की पकड इतनी मजबूत थी कि दोनों के बीच गुत्‍थम गुत्‍था होंने लगी। करण बचाव के लिए हाथ पांव मारने लगा तब तक राजाराम को ये पता नहीं था कि वह अनीता का कोई साथी है या वे दोंनों उसे मिलकर मारना चाहते है। लिहाजा जब अनीता ने करण को राजाराम की बलिष्‍ठ भुजाओं के चंगुल में फंसते देखा तो उसने अपने पर्स से झटपट सेविंग करने वाला ब्‍लेड निकाल लिया जिसे वह हत्‍या के मकसद से ही साथ लेकर आयी थी। उसने रूमाल से ब्‍लेड का एक कोना पकडा और पीछे से राजाराम की गर्दन को दबोचकर उसकी गर्दन पर ब्‍लेड चला दिया। गर्दन से खून को तेज फव्‍वारा छूटा ओर खून के फव्‍वारे से अनीता के कपड़ सन गए। राजाराम के गर्दन की नसें कट गई थी उसे उम्‍मीद नहीं थी कि अनीता उसका कत्‍ल करना चाहती है इसलिए वह उसके हमले से बेपरवाह था। कुछ क्षण तडपने के बाद राजाराम की प्राण पखेरू उड गए। अनीता और करण ने इत्‍मीनान से राजाराम की नब्‍ज व सांस जांचने के बाद जब विश्‍वास कर लिया कि उसकी मौत हो चुकी है तो उन्‍होंने उसकी कमीज की जेब में पडा मोबाइल निकालकर पहले उसे स्विच ऑफ किया फिर उसमें से सिम कार्ड निकाल लिया। सबूत मिटाने के लिए करण ने वहां पडे पतथर के टुकडों को जिनसे उसने राजाराम पर हमला किया था उन्‍हें राजाराम के ही लैपटॉप वाले बैग में भरा और सिम को भी तोडकर उसी में डाल दिया। इस दौरान चूंकि अनीता के कपडों पर काफी खून लग चुका था वह घर कैसे जाए और लोगों के पूछने पर क्‍या बहाना बनाए तो उसने तय किया कि वह अपना सिर फोड लेती है जिससे निकलने वाले खून को अपने खून से कपड़े खराब होंने की बात कहकर वह बच सकती थी। अनीता ने वहां पडे एक पतथर से अपने सिर पर दो तीन वार किएलेकिन उसका सिर नहीं फटा तो अनीता के कहने पर करण ने उसके सिर पर पत्‍थर के एक वार किया जिससे उसके सिर से खून बहने लगा। इसके बाद अनीता ने अपने ड्यूल सिम मोबाइल में से एक सिम निकालकर करण को वापस कर दिया। हालांकि अनीता ने करण को वो सिम वापस लौटाना था जो करण ने उसे राजाराम से बात करने के लिए दिया था लेकिन गलती से अनीता ने उसे अपना पर्सनल सिम दे दिया। उस सिम व पत्‍थर से भरे राजाराम के लैपटॉप वाले बैग को लेकर करण वहां से निकल गया। उसके पीछ ही पीछे अनीता भी पार्क से निकलकर सडक पर आ गई। करण ने कुछ आगे जाकर एक गदे पानी भरे गड्ढे में लैपटाप वाला बैग और राजाराम के मोबाइल के टूटे सिमकार्ड को फेंक दिया। इधर, अनीता तब तक अपने सिर से बहते खून के कारण अपने साथ दुर्घटना का तानाबाना बुन चुकी थी। करण उसे पहले आयुष्‍मान अस्‍तपाल लेकर पहुंचा ओर बताया कि इन मैडम को सडक पर ऐक्‍सीडेंट हो गया था वह उसे लेकर अस्‍तपाल आयर है। लेकिन वहां जब डाक्‍टरों ने ज्‍यादा पूछताछ शुरू की तो अनीता ने करण से वहां से चलने को कहा। करण ने वहीं से करण को तो वापस उसके घर जाने के लिए कह दिया और खुद आटो से लाइफ लाइन अस्‍पताल पहुंची और वहा जाकर अपने सिर पर पट्टी बंधवाई।

हांलाकि रास्‍ते में अनिता को लहूलुहान हालत में देखकर कुछ व्यक्तियों ने पुलिस को फोन कर दिया था। अनिता पर लोगों को शक इसलिए हुआ कि उसने सभी से मदद लेने से इन्कार कर दिया था।  लाइफलाइन अस्‍तपाल में ड्रेसिंग कराने से पहले ही अनीता ने अपने पति राजेश को फोन करके अस्‍पताल का पता देकर वहां आने के लिए कह दिया था और उसे बताया था कि उसका एक्‍सीडेंट हो गया है। जब राजेश वहां पहुंचा तो डाक्‍टरों ने बताया था कि अनीता के सिर से काफी खून बह चुका है ऐसे में उसे कुछ समय अस्‍पताल में ही रहना पड़ेगा। लेकिन अनीता ने ज्‍यादा बिल आने की बात कहकर वहां रूकने से मना कर दिया। हांलाकि सिर से ज्‍यादा खून बहने के कारण वाकई अनीता को चक्‍कर आ रहे थे इसलिए वह पति राजेश को लेकर बसई दारापुर स्थित सरकारी अस्‍पताल चली गई और रात को वहीं एमरजेंसी में भरी हो गई। वहां तीन दिन तक जब उसका इलाज चला तब तक पुलिस ने हत्‍याकांड की गुत्‍थी सुलझा ली थी और उसे डिसचार्ज होंते ही गिरफ्तार कर लिया। अनीता ने पूछताछ मे पुलिस को बताया कि वह कभी भी राजराम की हत्‍या नहीं करती अगर वह उस पर दबाव डालकर संबध बनाए रखने की जोर जबरदस्‍ती नहीं करता ।  करण व अनीता से पूछताछ के बाद इंसपेकटर संजय कुमार व उनके टीम ने अनीता के खून से सने कपड़े उसके घर से बरामद कर लिए। इसके अलावा राजाराम का मोबाइल करण के घर से बरामद कर लिया। साथ ही तीनो सिम कार्ड को भी जब्‍त कर लिया जिनका हत्‍या की साजिश में इस्‍तेमाल किया गया था। आवश्‍यक पूछताछ के बाद दोनों आरोनियों को द्वारका कोर्ट में सक्षम न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट के समक्ष पेश किया गया जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।


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