सोचता पल भर जो, तुझको ठहर जाना था।

दिल मे आदिल ने ठाना, की उधर जाना था,उनकी चाहत मगर, उसको तो मर जाना था।**पाले पत्थरबाज, होली खून की वो खेलता,उसने ठाना है,

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कायर दिल्ली के कारण करें परवाज सीमा पर।

वन्देमातरम दोस्तों तुम्हारे दम से ऐंठे है, ये पत्थरबाज सीमा पर,कायर दिल्ली के कारण, करें परवाज सीमा पर।** है अफजल और अजमल की, फांसी

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चलो सरहद पे चलना है, वतन ने फिर बुलाया है

चलो सरहद पे चलना है, वतन ने फिर बुलाया है,है बिस्मिल की खत्म छुट्टी, भगतसिंह लौट आया है। जो पत्थर बाज घाटी में, तिरंगे

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तुम चाहते हो आज भी लिखूं, कुमकुम, चन्दन रोली जी

तुम चाहते हो आज भी लिखूं, कुमकुम, चन्दन रोली जी,जबकि मेरे कान गूंजती,बन्दूकों की गोली जी।लुटा महावर, टूटी चूड़ी, बासन्ती अरमान जले,खूंआलूदा हो गई

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सोच सोच कर बतलाओ, क्यों भारत का सम्मान मिटे

चलो आ जाते है हम , बातचीत की मेज पर।उससे क्या कह आओगे, जो दुल्हन रोती सेज पर। उस बहना से क्या बोलोगे, राखी

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शहर शहर रणचंडी नाचे, शहर शहर श्मशान जले

यौवन ओर तरुणाई जल गई, बासन्ती अरमान जले,काश्मीर की घाटी में, सिंहों के सम्मान जले। वीर सपूत हुए न्योछावर, बातों की बलिवेदी पर,सिखण्डियों के

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फिर इकतालीस मारे गए, आतंक की आंधी में

वन्दे मातरम दोस्तों, ***फिर इकतालीस मारे गये, आतंक की आंधी में,ना जाने क्या ढूंढते हम, अहिंसा में गाँधी में.*** बहुत समय नही गुजरा है

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देश मांगता है, बदला और बलिदान नमो

बन्द करो ये क्रूर, कायर शांति गान नमो,देश मांगता है बदला और बलिदान नमो। रक्त रंजित पुलवामा की धरती रुदन मचाती है,सुहागिनों की मेहंदी

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अपनों की लाशों पर, वार्ताओं का दौर नही

पुलवामा में ढेर लगा,  शहीदी कंकालों का,रक्त रंजित रंग हो गया, नदियों और नालों का। शांति की बलिवेदी पर, निर्मम हत्याएं और नही,अपनों की

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